अन्तर्मना उवाच* (07 मई!)

अन्तर्मना उवाच* (07 मई!) *हमें अक्सर महसूस होता है कि दूसरों का जीवन अच्छा है..* *लेकिन हम भूल जाते हैं कि उनके लिये हम भी दूसरे ही हैं..!* हम यह नहीं कहते कि – तुम पूरी तरह से गूंगे हो जाओ, या फिर दिन भर ही बड़ बड़ाते रहो। *मैं तो यह कहता हूँ* — […]

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