*अन्तर्मना उवाच* (06 जून!)जो हमें बहुत खूबसूरत नजर आ रही है..*वो राहें तबाही के घर जा रही है..!*

*अन्तर्मना उवाच* (06 जून!)जो हमें बहुत खूबसूरत नजर आ रही है..*वो राहें तबाही के घर जा रही है..!* *जो हमें बहुत खूबसूरत नजर आ रही है..* *वो राहें तबाही के घर जा रही है..!* *जिस दिशा में तुम जा रहे हो, वो लक्ष्य विहिन दिशा है।* इसलिए सुबह-सुबह रोज इस बात पर चिन्तन करो –? […]

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