अन्तर्मना उवाच**अप्राप्त वस्तु का ही आकर्षण है..**वस्तु मिलने के बाद तो निर्मूल्य हो जाती है..!*

*अन्तर्मना उवाच**अप्राप्त वस्तु का ही आकर्षण है..**वस्तु मिलने के बाद तो निर्मूल्य हो जाती है..!* सभी साधु सन्यासी अप्राप्त वस्तु को पाने के लिये दौड़े-भागे जा रहे हैं,, *आकर्षण अपरिचित का है*। आत्मा है पर दिख नहीं रही,, हवा है महसूस हो रही है, पर दिख नहीं रही है। *बून्द मिटना चाहती है सागर बनने […]

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