न्याय और नीति के साथ चलो,अनीति करना और अनीति को सहना दोनों ही पाप है”- मुनि श्री प्रमाण सागर

“न्याय और नीति के साथ चलो,अनीति करना और अनीति को सहना दोनों ही पाप है”- मुनि श्री प्रमाण सागर भोपाल (अवधपुरी) “इस धरा पर कुछ ऐसे लोग भी होते है जिनका जन्म तो साधारण होता है,लेकिन उनका जीवन असाधारण होता है,वह व्यक्ति के तरह जन्म तो लेते है,लेकिन व्यक्तित्व बनाकर जीते है,और विभुति की तरह […]

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