कैबिनेट मंत्री प्रहलाद पटेल ने मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज का लिया आशीष बदलते परिवेश में जहां चिकित्सा पद्धति में बदलाव आया है वहीं नई बीमारियों ने जन्म लिया है निर्वेग़ सागर महाराज

धर्म

कैबिनेट मंत्री प्रहलाद पटेल ने मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज का लिया आशीष बदलते परिवेश में जहां चिकित्सा पद्धति में बदलाव आया है वहीं नई बीमारियों ने जन्म लिया है निर्वेग़ सागर महाराज
भोपाल
बदलते परिवेश में जहा चिकित्सा पद्धतियों में बदलाव आया है,वही नई नई बीमारियों ने जन्म लिया है,उपरोक्त उदगार मुनि श्री निर्वेगसागर महाराज ने वर्धमान नगर भोपाल में प्रातःकालीन धर्मसभा में व्यक्त किये।

 

 

मुनी श्री ने कहा कि पहले गांव का नाड़ी वैद्य नाड़ी पकड़कर रोग का पता लगा लेता था और साधारण बन औषधियों के माध्यम से रोग को ठीक कर दिया करता था आज एक एक रोग के विशेषज्ञ तैयार हो रहे है,तथा बीमारियां भी बढ़ती जा रही है।

आचार्य श्री ने मूकमाटी में लिखा है “बाधक कारण का अभाव साधक कारण का सदभाव सो कार्य की निस्पत्ती” किसी भी कार्य को संपन्न करने के लिये हमारे पास कितने अच्छे साधन हों यदि साधक कारण नहीं होंगे तो आप कार्य का निस्पादन नहीं कर सकते,उदाहरण देते हुये मुनि श्री ने कहा कि आप दीप प्रज्जवलन करना चाह रहे है दीपक में घी है,बाती है माचिस भी है लेकिन ऊपर पंखा चल रहा है तो आप दीप प्रज्वलित नहीं कर सकते दीप प्रज्वलन करना है तो सबसे पहले पंखा को बंद करना होगा उसी प्रकार आये हुये रोग का शमन हेतु सबसे पहले कारण कार्य व्यवस्था को समझना होगा।

 

पहले के जमाने में मां एक कुशल वैद्य हुआ करती थी बच्चे को जन्म देना भी मां कष्ट को सहन करते हुये अपनी साधना को पूर्ण करते हुये बच्चे को जन्म दिया करती थी मुनि श्री ने कहा कि पहले की मां तेरह चौदह बच्चों को जन्म देने के उपरांत भी मां और बच्चे दोनों स्वस्थ रहते थे मुनि श्री ने उदाहरण देते हुये कहा कि आर्यिका ज्ञानमति माताजी को देख लो वह 12 वे नंबर की संतान है, वही संविधान निर्माता भीमराव अंबेडकर 14 वे नंबर की संतान थे

आजकल की माताए कष्ट को सहना ही नहीं चाहती वह तो सीधे पेट चीरकर बच्चे को निकलवाने के लिये तत्पर रहती है,इसलिये डाक्टर भी आपरेशन से बच्चों को निकलवाने की सलाह देते है बच्चा भी समय पूर्व हो रहा है तथा मां भी कष्टों को सहना नहीं चाहती इसीलिये बच्चे भी पूर्ण स्वस्थ नहीं हो पाते और मां भी अस्वस्थ बनी रहती है। मुनि श्री ने कहा कि आने वाली पीढ़ी को मजबूत देखना चाहते हो तो थोड़ा कष्ट को भी सहना चाहिये, बच्चों को सर्दी होती है तो दवाई बच्चों को नहीं मां को दी जाती है। जैसे बच्चे को सर्दी हो रही है तो मां हल्दी सोंठ का दूध पीती थी मुनि श्री ने कहा कि आजकल बच्चे स्कूल से आते है वह बच्चों को फास्ट फूड देते हो और मैदा की वस्तुओं को खिलाओगे तो बीमारियों को गले लगाओगे।

मुनि श्री ने कहा कि आजकल की मां बच्चों को मोबाइल दे देती है और खाना बच्चों को ठूंसती रहती है यह उचित नही है बच्चो को प्यार से मां भोजन कराती है तो बच्चे बीमार नहीं पड़ते। कहावत है न कि
“मघा न बरसे भरे न खेत मां न परसे भरे न पेट”

 

मुनि श्री ने “परिवार सुरक्षा वृत” बताते हुये कहा कि जो स्त्री अपने बच्चों तथा परिवार के सदस्यों को स्वं भोजन पकाकर खिलाती है उसके पति एवं बच्चे कभी बीमार नहीं पड़ते मुनि श्री ने कहा कि भोजन में अभक्ष्य पदार्थों से बचें आजकल की मां बच्चों को फास्टफूड देना प्रारंभ कर देती है और बच्चे बीमारियों को गले लगा लेते है मुनि श्री ने कहा कि पहले की मां बच्चों के हित में कठोर रहती थी और उनका अनुशासन के साथ लालन पालन करती थी बच्चे स्वस्थ्य रहते थे।
मुनि श्री ने कहा कि आजकल बच्चों का हाथ नहीं पकड़ रहे बल्कि उसकी हर फरमाइश को पूरा कर देते हो वह मजबूत कहा से होगा उसमें संस्कार कहा से आऐंगे? मुनि श्री ने कहा कि परिधान की ओर आपका ध्यान नहीं है बच्चे ने जो फरमाइश की वह परिधान आप पहना देते है इससे बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास अवरुद्ध हो जाता है। उन्होंने कहा कि आजकल की माताए कौमल बच्चों को डाईपर पहना देती है यह भी उचित नहीं उसकी लंगोट में घंटों गंदगी भरी रहती है, इससे उसके कौमल अंगों में शिथिलता और अस्वस्थता आ रही है और उसके दुष्परिणाम निकल कर सामने आ रहे है तथा उनकी प्रजनन शक्ती नष्ट होती जा रही है।
मुनि श्री ने कहा कि जब आप शुरू से ही अपने घर में बच्चों को नशे की आदत डाल रहे है जब आप खुद चाय और काफी गुटखा का नशा करते है तो बच्चों को कैसे रोकोगे?
आने वाले समय में बच्चे नशे के इतने आदी हो जाएगे कि वह धर्म से दूर हो जाएगे,मुनि श्री ने कहा पहले के लोग दूध पीते थे और स्वस्थ रहते थे आजकल बच्चे चाय के इतने आदी हो गये है कि उनका पूरा इम्यून सिस्टम डैमेज हो जाता है।और आपकी भूख समाप्त हो जाती है।मुनि श्री ने कहा कि जो व्यक्ति चाय पीता है वह व्रत उपवास नहीं कर सकता क्योंकि उसे उपवास में चाय की तलफ लगेगी और देखा गया है कि उपवास में भी चाय काफी का उपयोग करता है यदि न मिले तो आपका सिर दर्द करता है।
यदि आप निर्दोष रुप से अपना जीवन जीना चाहते हो तो इस मीठे जहर को सबसे पहले खुद भी छोड़ो और बच्चों को भी न पीने दें।

यदि सुबह आपका पेट साफ नहीं होता है तो पानी में गुड़ डालो उसे उबाल कर उसमें थोड़ा नींबू और दालचीनी डालकर पीना शुरु कर दोगे तो आपकी चाय की आदत छूट
जाएगी।

उपरोक्त जानकारी देते हुये मुनिसंघ के प्रवक्ता अविनाश जैन ने बताया मध्यप्रदेश शासन के
कैबिनेट मंत्री श्री प्रहलाद पटेल ने वर्धमान नगर में मुनि श्री प्रमाणसागर जी, मुनि श्री संघान सागर जी महाराज सहित संघ के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया श्री जैन ने बताया प्रतिदिन के प्रवचन प्रातः 8:30 बजे से तथा शंकासमाधान सांयकाल 6-20 से चल रहा है।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *