कुंडलपुर ऐसा क्षेत्र है जहा पर प्रवेश करते ही अनायास परिणामो में उज्जवलता आती है समय सागर महाराज
कुंडलपुर
आचार्य श्री विद्यासागर महाराज से प्रथम दीक्षित शिष्य निर्यापक श्रमण पूज्य मुनि श्री 108 समय सागर महाराज ने मोक्ष मार्ग के विषय में एवं कुंडलपुर तीर्थ के बारे में बताया
महाराज श्री ने कहा कि द्रव्य अविनश्वर है, मगर अवस्थाएं परिवर्तन के लिए होती है। यहां पर कुंडलपुर सिद्ध क्षेत्र ऐसा सिद्ध क्षेत्र है जहां पर प्रवेश करते ही अनायास परिणामो में उज्जवलता आती है।






महाराज श्री ने कहा कि मन को केंद्रित करने के लिए बार-बार गुरुदेव का भी यही संकेत रहा है कि बहिरंग साधना करते हुए अनंत काल व्यतीत हुआ है, मगर यह साधना सिद्धत्व को प्राप्त करने में कारण क्यों सिद्ध नहीं हुई। क्योंकि वह बहिरंग साधना थी। और अंतरंग साधना के अभाव में लक्ष्य की प्राप्ति नहीं हो सकती। अब जब तक अंतरंग साधना नहीं होती, तब तक बहुत खुद आशाएं साथ लगी हुई होती है।
महाराज श्री ने कहा कि एक बार गुरुदेव के चरणों में पहुंचे उनके दर्शन के लिए तो उन्होंने एक बहुत मार्के की बात कही उन्होंने कहा कि मोक्ष मार्ग जटिल है पर कुटिल नहीं है। इन पंक्तियों को जब हमने सुना तो हमारी आंखें खुल गई। गुरुदेव के एक-एक वचन गुड वचन माने जाते हैं। ओर कुंद कुंद देव ने गुरु वचन को उपक्रम के रहते स्वीकार किया।
आचार्य श्री विद्यासागर महाराज को स्मृति में लाते हुए महाराज श्री ने कहा कि गुरुदेव रहे नहीं हम किसकी शरण में जाएं बहुत बड़ा प्रश्न चिन्ह था। आत्म साधना की माध्यम से विश्व को जो प्रकाश दिया प्रकाश में हम और आप रह रहे हैं। मोह को समाप्त करना हंसी खेल नहीं। मोह ऐसे समाप्त नहीं होता। तीर्थंकर बन अथवा ना बने, तीर्थंकरों के चरणों में एक स्थान मिल जाए बहुत बड़ी बात है। महाराज श्री ने कहा कि आचार्य महाराज की कितनी दूर दृष्टि है। हमारा हृदय हमेशा गुरु चरणों में रहे। इतने महान आचार्य के चरणों में रहकर 40 45 साल उनकी आज्ञा में साधना करने का रत्नत्रय आराधना करने का हम लोगों को सौभाग्य मिला।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312
