मानवता की जीती जागती मिसाल आचार्य चंदना श्री
राजगीर की वीरायतन की संचालिका आचार्य चंदना श्री महाराज को पद्मश्री से नवाजा गया यह कोई साधारण व्यक्तित्व नहीं बल्कि विलक्षण है इनके कार्य मानवता की एक जीती जागती मिसाल है इनकी द्रढ़इच्छा शक्ति इतनी है की यह कही ऐसे कार्य कर गयी जो इतिहास के पन्नो पर एक अमिट छाप छोडती है 84 वर्ष चंदना श्री 50 वर्ष मानवता की सेवा करती आ रही है 1972 से राजगीर विहार मे मानवता की सेवा का कार्य किया उनको यह प्रेरणा उपाध्याय अमरमुनि महाराज से मिली
शंकुतला से बनी चंदना श्री
26 जनवरी 1937 का वह क्षण जब यह भारत देश अंग्रेजी हुकूमत मे जकड़ा हुआ था तब पुणे जिला चस्कामन ग्राम के प्रेमकुवर कटारिया व माणिकचंद कटारिया की बगिया बहुमुखी विलक्षण प्रतिभा की धनी एक पुत्री का जन्म हुआ जो भील परिवार से है नामकरण हुआ नाम रखा गया शंकुतला शंकुतला का मन मोह राग से परे था महज 14 वर्ष की उम्र मे जैन दीक्षा को और साध्वी चंदना श्री हो गयी अनेक धर्मोग्रंथो को इन्होने गहनता से इन्होने जाना जिस हेतु इन्होने 12 वर्ष की मोंन साधना भी की होना क्या था शिक्षा की अनेक डिग्रिया उन्हे प्राप्त हुई और अनेक उपाधियो से सुशोभित हुई
शिक्षा सेवा मे अमूल्य योगदान
वीरायतन के नेत्र ज्योति सेवा मन्दिरम के दवारा लाखो व्यक्तियो को अंधकार से प्रकाश मिलाहै उनके नेत्रों को ज्योति मिली है वही मिली जानकारी अनुसार इनके द्वारा शिक्षा के क्षेत्र मे किये गए कार्यो मे पालीताना वीरायतन शिक्षा मे इन जगहों पर तीर्थंकर महावीर स्कूल आरभ किये जा चुके है।
इन महानतम कार्यो को सदा सदा याद किया जाता रहेगा। यह नारी शक्ति का गौरव बनकर उभरी है। साधना की प्रस्तर दिव्य ज्योति को कोटि कोटि नमन ।
अभिषेक जैन लुहाडिया रामगंजमडी
