तपती दुपहरी व गर्म मिट्टी पर नंगे पांव हुआ आचार्य विमर्श सागर का विहारश्रावक और सन्त, समाज की गाड़ी के परस्पर सहयोगी आचार्य विमर्श सागर
तपती दुपहरी व गर्म मिट्टी पर नंगे पांव हुआ आचार्य विमर्श सागर का विहारश्रावक और सन्त, समाज की गाड़ी के परस्पर सहयोगी आचार्य विमर्श सागर कामां सन्तो की साधना में सहयोगी बनने का कार्य श्रावक का होता है और प्रत्येक श्रावक को इसे अपना कर्तव्य समझ कर निभाना चाहिए, श्रावक और सन्त परस्पर समाज की […]
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