सत्य नहीं होता परिभाषित – रहता मात्र अनुभव गम्य..!अन्तर्मना आचार्य प्रसन्न सागरजी महाराज
सत्य नहीं होता परिभाषित – रहता मात्र अनुभव गम्य..!अन्तर्मना आचार्य प्रसन्न सागरजी महाराज कुलचाराम हैदराबाद (12 सितंबर) अन्तर्मना आचार्य प्रसन्न सागरजी महाराज ने अपने मंगल प्रवचन में उत्तम सत्य धर्म पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सत्य नहीं होता परिभाषित – रहता मात्र अनुभव गम्य.. उन्होंने कहा तुम- तुम्हारी उम्र से नौ महिने बड़े हो, […]
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