अंतर्मना उवाचअहिंसा, सत्य और अनेकांत की हृदयग्राही विमुग्धिकृत अभ्व मानवीय प्रस्तुति*वीतराग साधना पथ के अविराम पथिक*पूर्णिमा के चन्द्रमा की तरह उज्ज्वल — धवल — प्रकाशमानआचार्य श्री विद्या सागरजी महामुनिराज
अंतर्मना उवाचअहिंसा, सत्य और अनेकांत की हृदयग्राही विमुग्धिकृत अभ्व मानवीय प्रस्तुति*वीतराग साधना पथ के अविराम पथिक*पूर्णिमा के चन्द्रमा की तरह उज्ज्वल — धवल — प्रकाशमानआचार्य श्री विद्या सागरजी महामुनिराज ब्रह्माण्ड के देवता, विश्व हित चिन्तक, युग दृष्टा, सन्त शिरोमणि आचार्य श्री विद्या सागरजी महाराज रात्रि के तृतीय प्रहर में, देवत्व की राह में चले गये।देवताओं […]
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