सज्जन – दुर्जन की पहचान : जीवनवृत्ति है आचार्य श्री विशुद्धसागर

सज्जन – दुर्जन की पहचान : जीवनवृत्ति है आचार्य श्री विशुद्धसागर बड़ौत (उ.प्र.) आचार्य गुरूवरश्री विशुद्धसागर जी महाराज ने धर्मसभा में कहा कि चील मत बनो, चकोर बनो। चील उतंग आकाश में उड़ता है, पर भूमि पर पड़े मृत पशु को देखता है, दुर्गंधित मांस के टुकड़े को निहारता है और चकोर भूमि पर बैठा-बैठा […]

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