संसार रूपी भव समुद्र से पार उतरने के लिए अहिंसामय रत्नत्रय दया धर्म अपनाना होगा वात्सलय वारिधी आचार्य श्री वर्धमान सागर जी 

संसार रूपी भव समुद्र से पार उतरने के लिए अहिंसामय रत्नत्रय दया धर्म अपनाना होगा वात्सलय वारिधी आचार्य श्री वर्धमान सागर जी सलूंबर आचार्य शिरोमणी श्री वर्धमान सागर जी महाराज जैन बोर्डिंग भवन में विराजित हैं सकल जैन समाज सलूंबर की धर्म सभा में आचार्य श्री ने प्रवचन में बताया कि रत्नत्रय सम्यक दर्शन ,सम्यक […]

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