आरोग्य , बुद्धि, विनय,शास्त्रानुराग से किया गया स्वाध्याय का उद्यम पुण्यशाली फल होता हैं स्वाध्याय तप हैंआचार्य श्री वर्धमान सागर जी

आरोग्य , बुद्धि, विनय,शास्त्रानुराग से किया गया स्वाध्याय का उद्यम पुण्यशाली फल होता हैं स्वाध्याय तप हैंआचार्य श्री वर्धमान सागर जी बांसवाड़ा पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी संघ सहित खांदू कालोनी में विराजित हैं आज की धर्म सभा में आचार्य श्री ने धर्म देशना में बताया कि स्वाध्याय क्यों करना चाहिए, स्वाध्याय की […]

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