मन वाणी और व्यवहार मे जब एक रूपता आती है,वंहा से आर्जव धर्म की शुरूआत होती है”- मुनि श्री प्रमाण सागर

मन वाणी और व्यवहार मे जब एक रूपता आती है,वंहा से आर्जव धर्म की शुरूआत होती है”- मुनि श्री प्रमाण सागर भोपाल (अवधपुरी)” जैसा तुम बाहर से दिखना चाहते हो वैसा ही अंदर से बनो,चलो सीधा बनो सच्चा उपरोक्त उदगार मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ने पर्व के तीसरे दिवस उत्तम आर्जव धर्म पर व्यक्त किये। […]

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