छल कपट चैन हरे,लक्ष्मी न टिके बेमानी से* संजय जैन बड़जात्या कामांउत्तम आर्जव धर्म 10 सितम्बर विशेष*

*छल कपट चैन हरे,लक्ष्मी न टिके बेमानी से* संजय जैन बड़जात्या कामांउत्तम आर्जव धर्म 10 सितम्बर विशेष* दसलक्षण धर्म को क्रमांगत रूप से विश्लेषण करने पर यह पूर्णतया स्पष्ट होता है कि सर्वप्रथम धर्म क्षमा को यदि धारण कर लिया जाए तो फिर द्वितीय धर्म उत्तम मार्दव यथा मृदुता स्वयं चली आती है। यू कहे […]

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