आत्म स्वभाव की अनुभूति करना ही निर्ग्रन्थ साधक का लक्ष्य है* आचार्य विमर्श सागरचौबीस सन्तो के सानिध्य में हो रही जैन समाज कामां में धर्म प्रभावना,युवा वर्ग उत्साहित

आत्म स्वभाव की अनुभूति करना ही निर्ग्रन्थ साधक का लक्ष्य है* आचार्य विमर्श सागरचौबीस सन्तो के सानिध्य में हो रही जैन समाज कामां में धर्म प्रभावना,युवा वर्ग उत्साहित कामां शांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर के प्रांगण में स्थित विजयमती स्वाध्याय भवन में भावलिंगी संत दिगम्बर जैन आचार्य विमर्श सागर महाराज ने कहा कि निर्ग्रन्थ वीतरागी मुद्रा […]

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