जन्म, मरण संयम, तप, साधना पूर्वक समाधि मरण से सार्थक होता हैंआचार्य श्री वर्धमान सागर जी

जन्म, मरण संयम, तप, साधना पूर्वक समाधि मरण से सार्थक होता हैंआचार्य श्री वर्धमान सागर जी धरियावद. प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज की परंपरा के पंचम पट्टाधीश वात्सल्य वारिधी आचार्य श्री वर्धमानसागर जी महाराज अनेक जिनालयों मुनियों की जन्मस्थली धर्म नगरी धरियावद में 52 साधु सहित विराजित हैं। प्रतिदिन श्री जी का पंचामृत अभिषेक शास्त्र […]

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