ज्ञान से ध्यान में,ध्यान से भाव में,भाव में त्रिशुद्धि से भव का  परिवर्तन होता है मुनिश्री  प्रणित सागर जी।   

ज्ञान से ध्यान में,ध्यान से भाव में,भाव में त्रिशुद्धि से भव का  परिवर्तन होता है मुनिश्री  प्रणित सागर जी।    इंदौर वैशाली नगर त्रिशुधि की प्राप्ति विशुद्धता से होती है उसके बाद पंचम गति सिद्धालय की प्राप्ति होती है । त्रिशुधी पंचम गति प्राप्त करने के लिए श्रावक को पहले ज्ञान में परिवर्तन करना होगा […]

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