भगवान राग ओर द्वेष से रहित वीतरागी सर्वज्ञ और हितोपदेशी होते हैं आचार्य श्री वर्धमान सागर जी

भगवान राग ओर द्वेष से रहित वीतरागी सर्वज्ञ और हितोपदेशी होते हैं आचार्य श्री वर्धमान सागर जी टोंक समवशरण में विराजित भगवान वीतरागी सर्वज्ञ और हितोपदेशी है, उन्हें राग द्वेष नहीं होता है उनकी दिव्य देशना को तीन गति के जीव 12 कक्ष में बैठकर दिव्य देशना का श्रवण करते हैं। रत्न स्वर्ण के समवशरण […]

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