बातों से ज्यादा चुभता है, आपके बात करने का बर्ताव..जैसे – गमले में लगे पौधे की क्या खूब मजबूरी है,हरा भी रहना है और बढ़ना भी नहीं है..! अंतर्मना आचार्य प्रसन्न सागरजी महाराज
बातों से ज्यादा चुभता है, आपके बात करने का बर्ताव..जैसे – गमले में लगे पौधे की क्या खूब मजबूरी है,हरा भी रहना है और बढ़ना भी नहीं है..! अंतर्मना आचार्य प्रसन्न सागरजी महाराज कुलचाराम हैदराबाद अंतर्मना आचार्य प्रसन्न सागरजी महाराज का वर्षायोग कुलचाराम हैदराबाद में चल रहा है। पूज्य गुरुदेव ने अपनी वाणी से कृतार्थ […]
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