प्रकृति का धर्म है त्याग करना आचार्य श्री 108सुबल सागर जी महाराज

प्रकृति का धर्म है त्याग करना आचार्य श्री 108सुबल सागर जी महाराज चंडीगढ़ पर्यूषण पर्वराज का आज उत्तम त्याग का दिन है। त्याग का अर्थ है छोड़ना। प्रकृति भी परिवर्तन रूप त्याग को अपनाती है क्योंकी जब पतझड़ आयेगा तो समस्त पेड़ के पत्ते झड़ जाते है और तभी नए पत्ते आऐगो। इसी प्रकार पेड़ […]

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