जीवन में मंगल धर्म से होता है।धर्म,त्याग,तपस्या से कर्मो की निर्जरा करेआचार्य श्री वर्धमान सागर जी

जीवन में मंगल धर्म से होता है।धर्म,त्याग,तपस्या से कर्मो की निर्जरा करेआचार्य श्री वर्धमान सागर जी पारसोला प्रथमाचार्य चारित्रचक्रवर्ती आचार्य श्री शांतिसागरजी महाराज की मूल बाल ब्रह्मचारी पट्ट परंपरा के पंचम पट्टाधीश वात्सल्य वारिधी आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज संघ सहित पारसोला में विराजित है।आज धर्म सभा में आचार्य श्री ने बताया कि सिद्ध […]

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