जैन धर्म में वह शक्ति सामर्थ है कि वह पाप कर्मों को पुण्य संपदा में बदल सकती हैं ।आचार्य श्री वर्धमान सागर जी

जैन धर्म में वह शक्ति सामर्थ है कि वह पाप कर्मों को पुण्य संपदा में बदल सकती हैं ।आचार्य श्री वर्धमान सागर जी बांसवाड़ा आचार्य श्री वर्धमान सागर जी 30 साधुओं और मुनि श्री पुण्य सागर जी 19 साधुओं सहित बांसवाड़ा की खांदू कालोनी में विराजित हैं। सन 1950 में जन्मे, सन 1969 में दीक्षित […]

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