जीवन मे सदैव पुण्य एकत्रित करने का अवसर ढूँढ़ना चाहिए। अंतर्मना आचार्य 108 प्रसन्नसागरजी महाराज.
जीवन मे सदैव पुण्य एकत्रित करने का अवसर ढूँढ़ना चाहिए। अंतर्मना आचार्य 108 प्रसन्नसागरजी महाराज. हैदराबाद, / ‘ क्रोध, मान, माया, लोभ चार कषाय हैं। जो आत्मा को कसे, उसे कषाय कहते हैं। कषाय का आवेग होने पर उसमें बह नहीं जाना चाहिए, अपितु समता और शांति भाव से कषाय को जीतने का प्रयास करना […]
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