जन्म, जरा, मरण रूपी रोग रतनत्रय रूपी ओषधि से दूर होता है वात्सल्य वारिघि आ श्री वर्धमान सागर जी
जन्म, जरा, मरण रूपी रोग रतनत्रय रूपी ओषधि से दूर होता है वात्सल्य वारिघि आ श्री वर्धमान सागर जी साबला (डूंगरपुर) संसारी प्राणी संसार में राग द्वेष के कारण परिभ्रमण कर रहा है ,इस कारण कर्मों का आश्रव होता है और कर्म का बंधन होता है ।यद्यपि आत्मा अजर अमर है जन्म लेना आसान है […]
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