जन्म, मरण संयम, तप, साधना पूर्वक समाधि मरण से सार्थक होता हैंआचार्य श्री वर्धमान सागर जी

जन्म, मरण संयम, तप, साधना पूर्वक समाधि मरण से सार्थक होता हैंआचार्य श्री वर्धमान सागर जी धरियावद. प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज की परंपरा के पंचम पट्टाधीश वात्सल्य वारिधी आचार्य श्री वर्धमानसागर जी महाराज अनेक जिनालयों मुनियों की जन्मस्थली धर्म नगरी धरियावद में 52 साधु सहित विराजित हैं। प्रतिदिन श्री जी का पंचामृत अभिषेक शास्त्र […]

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जन्म, जरा, मरण रूपी रोग रतनत्रय रूपी ओषधि से दूर होता है वात्सल्य वारिघि आ श्री वर्धमान सागर जी

जन्म, जरा, मरण रूपी रोग रतनत्रय रूपी ओषधि से दूर होता है वात्सल्य वारिघि आ श्री वर्धमान सागर जी साबला (डूंगरपुर) संसारी प्राणी संसार में राग द्वेष के कारण परिभ्रमण कर रहा है ,इस कारण कर्मों का आश्रव होता है और कर्म का बंधन होता है ।यद्यपि आत्मा अजर अमर है जन्म लेना आसान है […]

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