मन, वचन, काय की कुटिलता का परित्याग कर चित्त में सरल निष्कपट भाव धारण करना ही उत्तम आर्जव धर्म है। देशभर से आए गुरुभक्तों ने आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का 76वां अवतरण वर्ष भक्ति पूर्वक मनाया।
मन, वचन, काय की कुटिलता का परित्याग कर चित्त में सरल निष्कपट भाव धारण करना ही उत्तम आर्जव धर्म है। देशभर से आए गुरुभक्तों ने आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का 76वां अवतरण वर्ष भक्ति पूर्वक मनाया। टोंक दशलक्षण पर्व के तृतीय उत्तम आर्जव दिवस पर आचार्य श्री ने अपने देशना में बताया कि भगवान […]
Read More