🟠 गुरु के बताए मार्ग पर चलना ही सच्ची गुरुभक्ति, आत्मकल्याण का सेतु है गुरु का सान्निध्य : निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108 योगसागर जी महाराज
🟠 गुरु के बताए मार्ग पर चलना ही सच्ची गुरुभक्ति, आत्मकल्याण का सेतु है गुरु का सान्निध्य : निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108 योगसागर जी महाराज रत्नकरण्डक श्रावकाचार की व्याख्या में मुनिश्री ने बताया सच्चे गुरु का स्वरूप, कहा— श्रद्धा तभी सार्थक जब उपदेश जीवन में उतरें कोटा, 4 अगस्त। श्री आदिनाथ दिगम्बर जैन पुण्योदय […]
Read More