अन्तर्मना उवाच* (22 मई!)अपनी आदतों के अनुसार चलने में, इतनी गलतियाँ नहीं होती..*जितनी दुनिया का ख्याल और लिहाज रखकर चलने में होती है..!*
*अन्तर्मना उवाच* (22 मई!)अपनी आदतों के अनुसार चलने में, इतनी गलतियाँ नहीं होती..*जितनी दुनिया का ख्याल और लिहाज रखकर चलने में होती है..!* *अपनी आदतों के अनुसार चलने में, इतनी गलतियाँ नहीं होती..* *जितनी दुनिया का ख्याल और लिहाज रखकर चलने में होती है..!* इसलिए *स्वयं को सुधारने का मार्ग है सन्यास*। दीक्षा या सन्यास […]
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