अन्तर्मना उवाच कोई भी खाली नहीं इस दुनिया में, सब गले तक भरे बैठे हैं. प्रसन्नसागर महाराज

अन्तर्मना उवाच कोई भी खाली नहीं इस दुनिया में, सब गले तक भरे बैठे हैं. प्रसन्नसागर महाराज कोई भी खाली नहीं इस दुनिया में, सब गले तक भरे बैठे हैं..कोई प्रेम से भरा है….कोई घृणा से, वैमनस्यता से, कोई यादों के झरोखे से….तो कोई स्वयं के कारणों से..!     ध्यान रखना –— घड़ी कोई […]

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