अन्तर्मना उवाच* आखा तीज — डालो मुक्ति का बीज*

अन्तर्मना उवाच* आखा तीज — डालो मुक्ति का बीज* *स्वयं कृतं कर्म यदात्मना परा फलं तदीयं लभते शुभा शुभम्* अच्छे बुरे कर्म का फल जीव को स्वयं को ही भोगना पड़ता है। *राजा हो या रंक, गरीब हो या अमीर, भिखारी हो या सम्राट सबको कर्म ने घेरा है।* इसलिए कोई भी कर्म करो तो […]

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