डॉ. वेदप्रताप वैदिक जी के कलम से

 

लाल किले से चुनावी शंखनाद
आज लाल किले से प्र.मं. नरेंद्र मोदी ने जितना प्रभावशाली भाषण दिया है, मुझे ऐसा लगता है कि इतना जोरदार भाषण आज तक किसी भी प्रधानमंत्री का नहीं हुआ। उन्होंने अपनी चार साल की उपलब्धियों का इतना सगुण-साकार विवरण पेश किया है कि विरोधी नेताओं का प्रकंपित होना स्वाभाविक है। उन्होंने अपनी सरकार की सफलताओं को किसानों, मजदूरों, वंचितों, स्त्रियों, नौजवानों, फौजियों, सभी भारतीयों को लाभान्वित करनेवाली बताया है। उन्होंने अपनी बेचैनी का भी जमकर जिक्र किया। वे भारत को महाशक्ति बनाने के लिए आतुर हैं। वे चाहते हैं कि भारत सबल और संपन्न बने। उन्होंने भावी भारत के लिए नए-नए सपने दिखाए हैं। मोदी के प्रयत्नों और सपनों के बारे में कोई शक नहीं किया जा सकता लेकिन मूल प्रश्न यह है कि अपनी सफलताओं के जो आंकड़े लाल किले से पेश किए गए हैं, क्या वे निर्विवाद हैं ?

उन पर कई तरह के प्रश्न-चिंह पहले भी लगते रहे हैं और अब तो उनकी और ज्यादा चीड़-फाड़ होगी। आश्चर्य की बात है कि मोदी नोटबंदी के मामले पर बिल्कुल मौन क्यों रहे ? काले धन की समाप्ति पर वे कुछ क्यों नहीं बोले ? नए नोट छापने पर जो 30 हजार करोड़ रु. बर्बाद हुए, उसके लिए कौन जिम्मेदार है ? 200 लोगों की मौत हुई, उसके लिए कौन जिम्मेदार है ? रोजगार के मौकों का क्या हुआ ? देश में बेकारी क्यों फैली ? देश के किसान इतने बेजार क्यों हैं ? देश में सांप्रदायिक तनाव और भय का माहौल क्यों बना हुआ है ? यह तो ठीक है कि जीएसटी से सरकार को अरबों-खरबों की नई आमदनी हो गई लेकिन आप लोगों को क्या चीजें सस्ती मिलने लगीं ? क्या मिलावट में कोई कमी आई ? क्या शिक्षा में कोई सुधार हुआ ? जातिवाद बढ़ा, आरक्षण की मांग बढ़ी। दलितों पर अत्याचार बढ़ा। विदेश नीति के मामले में हम अमेरिका और चीन के पिछलग्गू- से क्यों दिखाई पड़ रहे हैं ? पड़ौसी राष्ट्रों से दूरिया क्यों कायम हो गई ? हमारी पाकिस्तान-नीति मुंह के बल औंधी क्यों गिर गई? सर्जिकल स्ट्राइक का जिक्र-भर हुआ। यह क्यों नहीं बताया गया कि वह शुद्ध फर्जीकल क्यों सिद्ध हुई ? कश्मीर-नीति क्यों विफल हुई ? मोदी ने जो आंकड़े गिनाए, यदि उनका कोई ठोस असर हुआ होता तो वह उप्र के लोकसभा के 4 उपचुनावों में क्यों दिखाई नहीं पड़ा ? लाल किले से दिया गया यह भाषण देश की जनता यदि बिना चबाए निगल गई तो मान लीजिए कि विपक्ष का कबाड़ा हो जाएगा। आज भारत के विपक्ष के पास एक भी नेता ऐसा नहीं है, जो मोदी की टक्कर में खड़ा हो सके। मोदी ने लाल किले से अपने दूसरे आम चुनाव के भाषण की शुरुआत कर दी है। यह अगले चुनाव का शंखनाद है।

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